गरीबी


'गरीबी' या 'निर्धनता'जीवन जीने के जरूरी साधनों के अभाव की स्थिति का नाम है।

“गरीबी उन जरूरी वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति का अभाव है जो एक व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक तथा भावनात्मक रूप से व्यक्ति और उसके परिवार के स्वास्थ्य और कुशलता को बनाये रखने में अति आवश्यक होती है।” यदि हम यह सोचते हो कि केवल भोजन, वस्त्र और आवास के प्रबन्ध से ही निर्धनता की समस्या समाप्त हो सकती है तो हम गलत है क्योंकि ये तीनों चीजे हमारे जीवन की जरूरी नींव को ही मजबूत करने का कार्य करती है. गरीबी वह डायन है जो एक व्यक्ति को और उसके भीतर की मानवता को प्रतिपल मारती है , गरीबी जीवन , समाज और राष्ट्र पर बोझ है गरीबी व्यक्ति का न तो कोई सम्मान होता है और न उसके जीवन का कोई लक्ष्य ही बन पाता है उसका सारा जीवन जरूरत की वस्तुओ को एकत्रित करने में निकल जाता है गरीबी के बारे में लिखने में मेरा मन , मेरी बुद्धि ,मेरी आत्मा लिखने में असमर्थ है , शायद मेरी ही नही अपितु पृथ्वी के हर विचारक की यही स्तिथि होगी